महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की सच्चाई
  • Ashutosh
  • 29-07-2018
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Ashutosh
29-07-2018 11:08 PM

 

महाराष्ट्र में मराठा सड़कों पर हैं, वजह है आरक्षण... उनकी मांग है कि जो 72 हजार नौकरियों की भर्ती निकली है उसमें उनको आरक्षण दिया जाए..हाई कोर्ट ने फिलहाल नए प्रावधानों पर रोक लगा रखी है. मौजूदा प्रावधानों के अलावा किसी भी रिजर्वेशन पर रोक लगी हुई है इसलिए राज्य सरकार के पास काफी कम विकल्प बचे हैं. मराठों को ओबीसी आयोग के जरिए आरक्षण देने की कोशिश हो रही है क्योंकि ओबीसी कोटे से मराठाओं को हिस्सा देना मुशिकल होगा. यदि ऐसा किया गया तो एक नई जंग की शुरुआत हो सकती है.



आखिर क्या वजह है जो मराठा आरक्षण की मांग कर रहे हैं..इस पर पुणे के गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पोलिटिक्स एंड इकोनोमिक्स ने एक रिपोर्ट तैयार की है जिसके अनुसार महाराष्ट्र में करीब 31 फीसदी आबादी मराठों का है जो कई उपजातियों में बंटी हुई है. कुनबी मराठाओं को पहले से ही ओबीसी के तहत आरक्षण है. प्रदेश की सत्ता पर भी मराठाओं का दबदबा है. पूरे महाराष्ट्र में करीब 60 फीसदी स्थानीय निकायों में मराठाओं का कब्जा है.



महाराष्ट्र के 2947 घरों का सर्वे  किया गया जिसमें  मराठवाड़ा के 1395 घर और विर्दभ के 1532 घर हैं. इन सभी 2927 घरों में जो खुदकुशी के मामले हुए उसमें 26.3 फीसदी मराठा थे जबकि मराठवाड़ा में मराठों के खुदकुशी का मामला 53 फीसदी हैं .जिन मराठाओं ने खुदकुशी की उनमें से 95 फीसदी के पास जमीन था बाकी 5 फीसदी भूमिहीन थे. खुदकुशी करने वालों में 47 फीसदी सीमांत किसान यानि उनके पास एक से ढाई एकड़ तक जमीन थी. छोटे जोतदार जिनके पास ढाई से पांच एकड़ जमीन थी, 38 फीसदी किसानों ने आत्महत्या की जबकि लघु किसानों में से 10 फीसदी ने खुदकुशी की है. खुदकुशी करने वालों में से एक किसान के पास 20 एकड़ जमीन थी. खुदकुशी करने की वजह थी आर्थिक हालत का लगातार खराब होते जाना. पांच सालों तक उनकी हालत में कोई सुधार नहीं |

 

आखिर खुदकुशी के हालात क्यों बनते हैं? कारण है फसल का चौपट होना, पानी की कमी, उत्पाद की कम कीमत मिलना और कुओं का बंद होना. जहां तक कर्ज लेने की बात है, मराठवाड़ा में 63 फीसदी मराठा कर्ज लेते हैं जबकि विर्दभ में 74 फीसदी. अब देखते हैं कि मराठवाड़ा में मराठों की क्या हालत है. 53 फीसदी घरों में कोई कमाने वाला नहीं है. 34 फीसदी ने खेती करना छोड़ दिया है. 25 फीसदी लोगों के बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया है.
 

 


इन सारी वजहों को देखें तो लगता है कि बाहर से जितना लगता है कि मराठा बड़े अमीर लोग हैं, यह सही नहीं है, इसलिए उनका सड़कों पर आना और आरक्षण की मांग करना उनके लिहाज से सही है. अब देखना होगा कि सरकार इस समस्या का हल कैसे निकालती है.


 

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Ashutosh
29-07-2018 11:25 PM

मराठा आरक्षण: सर्वदलीय मीटिंग के बाद बोले फडणवीस, 'पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट के बाद बुलाएंगे विशेष-सत्र'

मराठा आरक्षण पर फंसती हुई नजर आ रही महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीसके नेतृत्व में मुद्दे का हल निकालने के लिए सर्वदलीय मीटिंग बुलाई। मीटिंग के बाद सीएम फडणवीस ने कहा कि मराठा आरक्षण पर सभी पार्टियां सहमत हैं और हम इस पर एकमत से स्टैंड लेंगे। 

फडणवीस ने कहा, 'हमने अपील की है कि स्थिति शांतिप्रिय रहे और कोई भी अनुचित कदम न उठाए। हमने पिछड़ा आयोग से रिपोर्ट मांगी है, इसके बाद हम विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएंगे। मैंने डीजीपी को निर्देश दिया है कि प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज किए वापस लें। केवल गंभीर मामलों जैसे- पुलिस पर हमला करनेवालों और आगजनी करनेवालों के खिलाफ ही कार्रवाई की जाए।' 

 

सीएम फडणवीस ने मराठा आरक्षण पर अपनी सरकार का बचाव करते हुए कहा, 'हमारी सरकार ने मराठा आरक्षण के लिए कानून बनाया था लेकिन हाई कोर्ट ने इसपर रोक लगा दी। हमें लगता है कि यह एक विशेष केस है और पिछड़ा आयोग की सलाह पर आरक्षण दिया जा सकता है। दुर्भाग्यवश आयोग के पहले मुखिया की मृत्यु हो गई और दूसरे अध्यक्ष की नियुक्ति में काफी वक्त लग गया।' 

 

उन्होंने यह भी कहा, 'अगर किसी कॉलेज को प्रैक्टिकल प्रॉब्लम है तो हम सहयोग करने को तैयार हैं लेकिन अगर वे मराठा छात्रों को जान-बूझकर फीस के मामले पर परेशान करेंगे तो शिक्षा विभाग उनके लाइसेंस कैंसल कर देगा।

 

 

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